नदी तट पर बैठी थी
वह औरत .....
रोज देखती थी ...
उसमे गिरते गंदे नालों को
उसे लगता
मैं भी इसी गन्दी नदी की तरह हू ॥
मानव व्यापार करने वालों ने
धकेल दिया मुझे .....
अँधेरी गलियो में ॥
मैं भी नदी की तरह
कितनों से समागम कर
ढ़ोती हू ...उनकी गंदगी ॥
फिर कुछ दिन बाद
एक बाढ़ आयी ....
नदी साफ़ हो गयी ॥
तट पर बैठी औरत सोच रही थी
क्या मेरी जिन्दगी में भी कभी
इसी तरह कोई बाढ़ आएगी ?
वह औरत .....
रोज देखती थी ...
उसमे गिरते गंदे नालों को
उसे लगता
मैं भी इसी गन्दी नदी की तरह हू ॥
मानव व्यापार करने वालों ने
धकेल दिया मुझे .....
अँधेरी गलियो में ॥
मैं भी नदी की तरह
कितनों से समागम कर
ढ़ोती हू ...उनकी गंदगी ॥
फिर कुछ दिन बाद
एक बाढ़ आयी ....
नदी साफ़ हो गयी ॥
तट पर बैठी औरत सोच रही थी
क्या मेरी जिन्दगी में भी कभी
इसी तरह कोई बाढ़ आएगी ?

