बबन पाण्डेय की गंभीर कविताएं
Friday, 6 July 2012
छाता
छाता
उसके काले होने पर
मत जाईये
सोख लेता है
धूप
चुपचाप ॥
वो देखिये
अनजाने में भी
साथ हो लिए
एक छाते के अन्दर ॥
माखन चोर ने भी
बनाया था छाता
गोवर्धन पर्वत का
अपने सखाओ को
बचाने के लिए ॥
हमें भी
बनना चाहिए
एक -दुसरे का छाता ॥
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