Friday, 6 July 2012

छाता

छाता
उसके काले होने पर
मत जाईये
सोख लेता है
धूप
चुपचाप ॥

वो देखिये
अनजाने में भी
साथ हो लिए
एक छाते के अन्दर ॥

माखन चोर ने भी
बनाया था छाता
गोवर्धन पर्वत का
अपने सखाओ को
बचाने के लिए ॥

हमें भी
बनना चाहिए
एक -दुसरे का छाता ॥

23 comments:

  1. kash ham ban pate ek dusre chhata:)

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  2. Babban Ji ,humesha ki tarah lajawab.
    Gazab likhte hain maharaj.Aise hi likhte rahe..
    Bijay Pathak

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  3. ATYANT HI SRIJANSHEEL HAI AAPKI PAINI NIGAHE ... KEEP IT UP ...PANDEY JEE ...BAHUT BAHUT ..DHANYVAD

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  4. छाता से हमारा है गहरा नाता
    बुरी निगाहों से हमें बचाता
    सुरक्स्चित घर पहुचाता
    डंडे के भी काम आता I

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  5. ये कविता बिम्बपरक है !बहुत सुन्दर !

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  6. इस कबिता में चार तत्व का समिश्रण है भाव, बुद्धि, शैली और कल्पना !

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (07-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  8. वाह ... अनुपम प्रस्‍तुति।

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  9. एक सार्थक कमेन्ट के लिए मीन प्रसाद पाण्डेय जी का आभार

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  10. बहुत सुंदर रचना,,,आसान,,शब्दों में गंभीर बाते कहना आप की विशेषता है,,,आभार पाण्डेय जी

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  11. अति सुन्दर तुलना छाते और गोवर्धन पर्वत की बबन भाई.....बिलकुल ही अलग तरह की......बहुत अच्छा........ध्येय एक ही सभी को विपत्ति से बचना.....कोई भेदभाव नहीं......

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  12. बहुत सुंदर रचना,,,आसान,,शब्दों में गंभीर बाते कहना आप की विशेषता है,,,आभार पाण्डेय जी

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  13. बहुत खूब|||
    बहुत सुन्दर रचना....

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  14. यह छाता तो सभी को चाहिये.

    बहुत सुंदर रचना.

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  15. Bahut khoob.....is Chhate ki bahut demand hai........

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  16. बहुत ही सुन्दर ख़्याल की कविता बबन जी ..

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  17. Bahot aache - like it - best wishes

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  18. बढ़िया लिखते हैं ...

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  19. एक हमें भी चाहिए ...
    आभार !

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  20. सहयोग का आवाहन करता छाता और उसका रूपक ,छाता तो बाप का होता है निस्स्वार्थ प्रेम का ,अन्यत्र भी मिले तो क्या बात है .
    माखन चोर ने भी
    बनाया था छाता
    गोवर्धन पर्वत का
    अपने सखाओ को
    बचाने के लिए ॥बब्बन भाई "सखाओं "कर .लें .

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