Wednesday, 18 April 2012

पेड़ और लड़की

जैसे-जैसे
बड़ा होता है पेड़
टिकने लगती हैं निगाहें
मानों ......
जवान हो रही हो एक लड़की //

कोई फलों को तोड़ कर
मिटाता है अपनी भूख
कोई करता है इंतज़ार
तनाओं के मांसल होने का //

ठीक वैसे ही
ताक में रहता है आदमी
किसी लड़की को देखकर
फिर एक दिन
काट देता है आदमी
"पेड़ और लड़की " दोनों को //

14 comments:

  1. बिलकुल सत्य और मार्मिक रचना है बड़े भाई -----------बधाई स्वीकारें !!

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  2. Replies
    1. जैसे-जैसे
      बड़ा होता है पेड़
      टिकने लगती हैं निगाहें
      मानों ......
      जवान हो रही हो एक लड़की //
      a good comparision sir jee..

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  3. शुक्रिया प्रवीन द्विवेदी जी
    अविनाश रामदेव भाई
    और माधवी मिश्र जी

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  4. बहुत अच्छी तुलना की है सर!


    सादर

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  6. बेहद मार्मिक रचना, बधाई.

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  7. Replies
    1. बहुत सुन्दर कविता है ,और कविवर को धन्यबाद न दी जाए तो उचित न होगा /

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  8. Shabdon ka jod gud hai...par ro dena kafi nahi hai...Baban sahab samaj solution bhi chahta hai....dukhti rag choodena okay...dard ka marham bhi batayein...we need people who can fill us with energy n confidence....dard ka proof...we know..we don't need..

    ReplyDelete
  9. Shabdon ka jod gud hai...par ro dena kafi nahi hai...Baban sahab samaj solution bhi chahta hai....dukhti rag choodena okay...dard ka marham bhi batayein...we need people who can fill us with energy n confidence....dard ka proof...we know..we don't need..

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  10. एक दिन
    काट देता है आदमी
    "पेड़ और लड़की " दोनों को //
    -नित्यानंद गायेन

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